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बीए सेमेस्टर-1 इतिहास

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2022
पृष्ठ :325
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2628
आईएसबीएन :000000000

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बीए सेमेस्टर-1 इतिहास के नवीन पाठ्यक्रमानुसार प्रश्नोत्तर

प्रश्न- वेंगी के पूर्व चालुक्यों पर टिप्पणी लिखिए।

उत्तर-

वेंगी के पूर्व चालुक्य

विष्णुवर्द्धन प्रथम (621 ई. से 633 ई.) - बादामी के पूर्वकालीन पश्चिमी चालुक्यों के राजा पुलकेशिन ने अपने भाई विष्णुवर्द्धन को आन्ध्र प्रदेश का गवर्नर नियुक्त किया था। विष्णुवर्द्धन ने वहाँ एक स्वतन्त्र शासन की स्थापना की और उस वंश के राजाओं ने वहाँ 500 वर्ष तक राज्य किया। उन्होंने वेंगी को अपनी राजधानी बनाया। विद्वानों का मत है कि 'किरातार्जुनीयम् रचयिता महाकवि भारवि विष्णुवर्द्धन के समय में ही हुआ था। विष्णुवर्द्धन ने 633 ई. तक राज्य किया।

जयसिंह - सन् 633 ई. मे विष्णुवर्द्धन का पुत्र जयसिंह देंगी के सिंहासन पर आरूढ़ हुआ। उसके समय में बादामी के मूल चालुक्य शाखा के राजा पुलकेशिन द्वितीय पर पल्लव राजा नरसिंह वर्मन ने आक्रमण किया। बादामी के चालुक्यों और नरसिंह वर्मन का बादामी पर अधिकार हो गया। ऐसा प्रतीत होता है कि जयसिंह प्रथम ने इस युद्ध में अपने चाचा पुलकेशिन द्वितीय की कोई सहायता न की और आपसी फूट के कारण ही चालुक्य पराजित हुए। जयसिह प्रथम को पृथ्वीवल्लभ, जयसिंह और सर्वसिद्धि आदि नामों से भी सम्बोधित किया जाता है।

इन्द्रवर्मन - जयसिंह प्रथम की मृत्यु के बाद 663 ई. में उसका भाई इन्द्रवर्मन वेगी के चालुक्य सिंहासन पर आरूढ़ हुआ और उसने सिंह विक्रम तथा 'त्याग धेनु' आदि उपाधियाँ धारण की। कहा जाता है कि उसने कुल एक सप्ताह तक ही शासन किया। उसे इन्द्रभद्रराज, इन्द्रराज इन्दुराज और इन्दुमहाराज के नामों से पुकारा जाता है।

विष्णुवर्द्धन द्वितीय (663 ई. से 672 ई.) - इन्द्रवर्मन के बाद उसका पुत्र विष्णुवर्द्धन सिहासनारूढ़ हो गया तथा उसने 672 ई. तक राज्य किया। उसके लिए प्रत्यादित्य, विषमसुद्धि' और मकर ध्वज आदि उपाधियों का प्रयोग किया जाता है।

मंगि युवराज (672 ई. - 696 ई.) - यह विष्णुवर्द्धन द्वितीय का पुत्र था और उसके बाद सिंहासनारूढ़ हुआ। उसने अपने को 'सर्वलोकाश्रय' तथा 'विजय सिद्धि' आदि उपाधियों से विभूषित किया।

जयसिंह द्वितीय (696 ई. - 709 ई.) - 696 ई. के मंगि युवराज का पुत्र जयसिंह द्वितीय वेंगी के सिंहासन पर आरूढ हुआ। उसने अपने भाई विजयादित्यम वर्मन को मध्यम कलिंग का गवर्नर नियुक्त किया, परन्तु उसके भाई ने उसे धोखा दिया और बाद में अपने को स्वतन्त्र शासक घोषित कर दिया। जयसिंह के लिए 'सर्वलोकाश्रय' और 'सर्वसिद्धि' आदि उपाधियों का प्रयोग किया गया है।

कोकिल विक्रमादित्य (सन् 709 ई.) - जयसिंह द्वितीय की मृत्यु के पश्चात् वेंगी का सिंहासन उसके सौतेले भाई कोक्किल विक्रमादित्य के हाथ में आया। उसे विजयसिद्धि के नाम से भी पुकारा जाता है। उसने कुल 6 माह तक राज्य किया, परन्तु इन 6 महीनों में ही उसने मध्यम कलिंग पर अधिकार कर लिया। इसके बाद उसके बड़े भाई विष्णुवर्द्धन तृतीय ने राज्य छीन लिया था।

विष्णुवर्द्धन तृतीय (709 ई. से 746 ई.) - सिंहासन पर बैठते ही विष्णुवर्द्धन ने अपने को त्रिभुनाकुश 'विषमसिद्धि और समस्त भुवनाश्रय आदि उपाधियों से विभूषित किया। उसने निषादराज पृथ्वी व्याघ्र के आक्रमण का सामना किया परन्तु पराजित हुआ और उसके राज्य के कुछ भाग पर पृथ्वीव्याघ्र का अधिकार हो गया। कुछ समय बाद विष्णुवर्द्धन तृतीय के सेनापति ने उसके द्वारा खोये हुए राज्य को पुन प्राप्त कर लिया।

विजयादित्य प्रथम (746 ई. से 764 ई.) - सन् 746 ई में विष्णुवर्द्धन तृतीय की मृत्यु हो गयी और उसके बाद उसके पुत्र विजयादित्य प्रथम ने वेंगी का राज्यभार ग्रहण किया। उसने अपने को 'विक्रमराज', 'शक्तिवर्मन' और विजयसिद्धि आदि उपाधियों से विभूषित किया। उसके शासनकाल में बादामी की चालुक्य शाखा का राजा कीर्तिवर्मन द्वितीय पर पहले राष्ट्रकूट राजा दन्तिदुर्ग ने और फिर उसके चाचा कृष्ण प्रथम ने आक्रमण करके बादामी के चालुक्यों के शासन को सीमित कर दिया और अन्त मे वहाँ राष्ट्रकूटों का शासन स्थापित हो गया। वेंगी के चालुक्य राजा विजयादित्य प्रथम अपने सम्बन्धी बादामी के राजा की कोई सहायता न कर सका। विजयादित्य प्रथम ने 764 ई. तक राज्य किया।

विष्णुवर्द्धन चतुर्थ (764 ई. से 799 ई.) - विष्णुवर्द्धन चतुर्थ विजयादित्य प्रथम के बाद वेंगी के सिंहासन पर आरूढ़ हुआ। उसके शासनकाल में राष्ट्रकूट वंश के राजा कृष्ण प्रथम ने देंगी पर आक्रमण किया और विष्णुवर्द्धन को पराजित करके अपने अधीन कर लिया। कृष्ण प्रथम के बाद राष्ट्रकूटों गृहयुद्ध हुआ। गोविन्द द्वितीय और उसके भाई एक-दूसरे से लड़ पड़े। विष्णुवर्द्धन ने गोविन्द का पक्ष लिया। दुर्भाग्यवश गोविन्द पराजित हुआ और उसके विजयी भाई ध्रुव ने विष्णुवर्द्धन चतुर्थ से भी बदला लिया। ध्रुव ने विष्णुवर्द्धन पर आक्रमण करके उसे अपने अधीन कर लिया, विष्णुवर्द्धन चतुर्थ ने अपनी पुत्री शील का विवाह भी ध्रुव से सम्पन्न किया।

विजयादित्य द्वितीय (799 ई. - 834 ई.) - 799 ई. में विष्णुवर्द्धन चतुर्थ के बाद उसका पुत्र विजयादित्य द्वितीय सिहासनारूढ़ हुआ। सिहासन पर बैठते ही उसे अपने भाई भीम सालुक्कि का सामना करना पड़ा। राष्ट्रकूट राजा गोविन्द द्वितीय ने भीम-सालुक्कि का पक्ष लिया और विजयादित्य को सिंहासन छोड़ना पड़ा। दुर्भाग्यवश 414 ई. में गोविन्द तृतीय परलोक सिधार गया और राष्ट्रकूटो का सिंहासन अमोघवर्ष प्रथम को प्राप्त हुआ। उसके शासनकाल में राष्ट्रकूट राज्य में चारों ओर अराजकता की सी स्थिति हो गयी थी। अवसर से लाभ उठाकर विजयादित्य ने भी सालुकि पर आक्रमण कर दिया। राष्ट्रकूटो की सहायता की अनुपस्थिति मे भीमसालुकि पराजित हुआ और वेंगी का सिंहासन विजयादित्य के हाथ पुनः लग गया। इसके बाद विजयादित्य ने राष्ट्रकूटों पर आक्रमण किया और स्तम्भ नगर खूब लूटा। यह दक्षिण के गंगों को पराजित करने में भी सफल हुआ। परन्तु कुछ दिनों बाद अमोघवर्ष ने गुजरात के अपने अधीनस्थ गवर्नर कर्क की सहायता से विजयादित्य द्वितीय को पराजित करके अपने राज्य से बाहर भगा दिया। कहा जाता है कि विजयादित्य से गुर्जर प्रतिहार राजा नागभट्ट द्वितीय ने लोहा लिया था। विभिन्न अभिलेखो से उसके लिए महाराजाधिराज, परमेश्वर और परमभट्टारक की उपाधियों के संकेत मिलते हैं।

विष्णुवर्द्धन पंचम् (843 ई. - 844 ई.) - यह विजयादित्य द्वितीय का पुत्र था और उसने एक वर्ष से अधिक समय तक राज्य किया। उसके लिए विषम सिद्धि' 'सर्वलोकाक्षय' और कालि-विष्णुवर्द्धन आदि उपाधियो का प्रयोग हुआ है।

विजयादित्य तृतीय (844 ई. - 888 ई.) - विष्णुवर्द्धन पंचम के बाद विजयादित्य तृतीय राजा हुआ। यह वेगी की शाखा का अत्यन्त महान शासक हुआ और इसने विभिन्न युद्धों में विजय प्राप्त की। पल्लवों पर विजय सिहासनारूढ़ होने के बाद विजयादित्य तृतीय ने पल्लवो पर आक्रमण किया और नेल्लूर नगर छीन लिया।

पाण्ड्यों पर विजय - इसके बाद उसकी दृष्टि पाण्ड्यों की ओर गयी और उसने उन्हें भी पराजित किया।

मैसूर पर विजय - उस काल में मैसूर को कोलम्ब राज्य कहा जाता था। वहाँ मंगी का शासन था। विजयादित्य ने मंगी पर आक्रमण करके उसे मौत के घाट उतार दिया और मैसूर पर अपना अधिकार कर लिया।

गंगों पर आक्रमण - गंगो पर भी विजयादित्य तृतीय ने आक्रमण किया। उसका गंगवडि पर आक्रमण इतना भीषण हुआ कि गंग पराजित हुये और इन्होंने उसके सम्मुख नतमस्तक होना स्वीकार कर लिया।

राष्ट्रकूटों पर विजय - विजयादित्य की बढ़ती हुई शार्वले राष्ट्रकूट नरेश कृष्ण द्वितीय की आँख का कांटा थी। राष्ट्रकूट नरेश किसी प्रकार चालुक्यों को दबाना चाहता था. फलतः किरणपुर में कृष्ण द्वितीय और विजयादित्य तृतीय के मध्य युद्ध हुआ। इस युद्ध में राष्ट्रकूट राजा कृष्ण द्वितीय पराजित हुआ और उसे भागकर कलचुरि नरेश शकरगण (शकिल) के राज्य में शरण लेनी पड़ी। शकिल कृष्ण द्वितीय का साला था। विजयादित्य तृतीय की इस विजय से चालुक्यों की धाक जम गयी, उसने राष्ट्रकूट राज्य को पूर्णतः पराक्रांत कर दिया।

अन्य विजयें - विजयादित्य तृतीय ने दक्षिण कौशल के राजा को पराजित करके उनसे बहुत

से हाथी छीन लिये तथा वेगुल वाड़ के चालुक्य सामन्त बड़डेवा को भी हराया।

मृत्यु एवं उपाधियाँ - सन् 888 ई. के लगभग विक्रमादित्य तृतीय की मृत्यु हो गयी, उसने भुवनकदर्प, विक्रमधवल, भिभानाकुश, परचक्रराम, रणरगशूद्रक नृपतिमार्तण्ड आदि उपाधियाँ धारण की थीं।

भीम प्रथम (888 ई. - 918 ई.) - ऐसा प्रतीत होता है कि विक्रमादित्य तृतीय के कोई पुत्र न था और फलस्वरूप उसके बाद उसका भतीजा भीम प्रथम वेगी का चालुक्य राजा हुआ। उसके शासनकाल में राष्ट्रकूट नरेश कृष्ण द्वितीय ने अपनी पराजय का बदला लेने के लिए वेगी पर आक्रमण किया और भीम को बन्दी बना लिया। परन्तु थोड़े ही दिनों के बाद भीम फिर मुक्त कर दिया गया और उसने राष्ट्रकूटों के विरुद्ध फिर से सैन्य-संगठन करके उन्हें पराजित कर दिया। उसने कर्नाटक नरेश और लाट नरेश को भी पराजित किया। कृष्ण द्वितीय ने वेंगी पर अपना अधिकार करना चाहा परन्तु भीम के प्रयत्नो से उसे सफलता न मिली और वह फिर पराजित हुआ।

भीम प्रथम के लिए 'भिभुवनाकुश' 'सर्वलोकाश्रय और परमब्रहमण्य आदि उपाधियों का प्रयोग हुआ।

अन्य शासक (918 ई. - 1120 ई. तक) - भीम के पश्चात् प्रथम विजयादित्य चतुर्थ सिंहासनारूढ़ हुआ। उसने केवल 6 माह तक राज्य किया और वह राष्ट्रकूटों के विरुद्ध युद्ध करता मारा गया। तत्पश्चात् शासन की बागडोर अम्म प्रथम के हाथ आयी, अम्म ने 919 ई. से 926 ई तक राज्य किया। सन 926 ई. में विजयादित्य का शासन थोड़े ही दिन तक रहा और उसके बाद थोडे समय के लिए ताल प्रथम राजा हुआ। सन् 928 ई. में विक्रमादित्य द्वितीय चालुक्य शासक बना परन्तु 928 ई. में अम्य प्रथम के पुत्र भीम द्वितीय ने भी केवल एक वर्ष तक राज्य किया और 928 ई में ताल के पुत्र मल्ल द्वितीय ने उसे मार डाला और उसके शासन की बागडोर स्वयं अपने हाथो में ले ली।

मल्ल द्वितीय ने 935 ई. तक राज्य किया। उसके शासनकाल में चालुक्य राष्ट्रकूटों के प्रभाव में आ गये। 935 ई. में अम्य प्रथम के भाई चालुक्य भीम तृतीय ने उससे सिहासन छीन लिया और 946 ई तक राज्य किया। चालुक्य भीम तृतीय अत्यन्त पराक्रमी था। उसने राष्ट्रकूट नरेश गोविन्द चतुर्थ, 'सर्वलोकाश्रय और राजमार्तण्ड तथा 'गण्डमहेन्द्र' आदि उपाधियाँ धारण की। 946 ई में उसकी मृत्यु हो गयी।

भीम द्वितीय की मृत्यु के बाद उसका पुत्र अम्म द्वितीय सिंहासनारूढ़ हुआ। 956 ई में राष्ट्रकूट नरेश कर्ण तृतीय की सहायता से युद्धमल्ल के पुत्र बादप ने उसे सिहासन से हटा दिया और स्वयं विजयादित्य के नाम से गद्दी पर बैठा। विजयादित्य के पश्चात् उसके भाई ताल द्वितीय 907 ई. में अम्म द्वितीय द्वारा मार डाला गया और अम्म द्वितीय का सिंहासन पर अधिकार हो गया। परन्तु शीघ्र ही अम्म द्वितीय के भाई दानावर्ण ने उसकी हत्या कर दी और 970 ई. से 973 ई. तक दानावर्ण राजा रहा। 973  में जोडभीम ने दानावर्ण की हत्या कर दी और 999 ई. तक राज्य किया। 999 ई. में राजराज चोल ने जोडभीम पर आक्रमण करके उसका राज्य छीन लिया और दानावर्ण के पुत्र शक्तिवर्मन को सिंहासन पर आरूढ किया। शक्तिवर्मन ने 1011 ई. तक राज्य किया।

शक्तिवर्मन के बाद छोटे-छोटे राजा हुए। सन् 1063 ई में कुलोतुंग चोल वेगी के सिंहासन पर आरूढ हुआ उसके शासनकाल से चोल और चालुक्य राज्य एक हो गये।

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    अनुक्रम

  1. प्रश्न- ऐतिहासिक युग के इतिहास पर प्रकाश डालिए।
  2. प्रश्न- सिन्धु घाटी सभ्यता का परिचय दीजिए व भारत में उसके बाद विकसित होने वाली सभ्यता व संस्कृति को चित्रित कीजिए।
  3. प्रश्न- भारत के प्रख्यात इतिहाकार कल्हण व आर. सी. मजूमदार का परिचय दीजिए।
  4. प्रश्न- भारतीय ज्ञान प्रणाली के स्रोत पर प्रकाश डालिए।
  5. प्रश्न- जदुनाथ सरकार, वी. डी. सावरकर, के. पी. जायसवाल का परिचय दीजिए।
  6. प्रश्न- भारत के प्रख्यात इतिहासकार मृदुला मुखर्जी के बारे में बताइए।
  7. प्रश्न- भारत संस्कृति (भाषाओं) के ज्ञान से अवगत कराइये।
  8. प्रश्न- नृत्य व रंगमंच की भारतीय संस्कृति से अवगत कराइये।
  9. प्रश्न- सिन्धु घाटी सभ्यता से मगध राज्य तक पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  10. प्रश्न- भारत के प्रख्यात इतिहासकार विपिनचन्द्र पर टिप्पणी लिखिए।
  11. प्रश्न- मध्य पाषाण समाज और शिकारी संग्रहकर्ता पर टिप्पणी कीजिए।
  12. प्रश्न- ऊपरी पुरापाषाण क्रांति क्या थी?
  13. प्रश्न- प्रसिद्ध इतिहासकार रोमिला थापर पर संक्षिप्त टिप्पणी कीजिए।
  14. प्रश्न- पाषाण युग की जीवनशैली किस प्रकार की थी?
  15. प्रश्न- के. पी. जायसवाल के विशिष्ट कार्यों से अवगत कराइये।
  16. प्रश्न- वी. डी. सावरकर के धार्मिक और राजनीतिक विचार से अवगत कराइये।
  17. प्रश्न- लोअर पैलियोलिथिक पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  18. प्रश्न- सिन्धु घाटी सभ्यता के विषय में आप क्या समझते हैं? 'हड़प्पा संस्कृति' के निर्माता कौन थे? बाह्य देशों के साथ उनके सम्बन्धों के विषय में आप क्या समझते हैं?
  19. प्रश्न- सिन्धु घाटी सभ्यता के सामाजिक व्यवस्था का वर्णन कीजिए।
  20. प्रश्न- सिन्धु घाटी सभ्यता के लोगों के आर्थिक जीवन के विषय में विस्तारपूर्वक बताइये।
  21. प्रश्न- सिन्धु नदी घाटी के समाज के धार्मिक व्यवस्था की प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
  22. प्रश्न- सिन्धु घाटी सभ्यता की राजनीतिक व्यवस्था एवं कला का विस्तार पूर्वक वर्णन कीजिए।
  23. प्रश्न- सिन्धु सभ्यता के नामकरण और उसके भौगोलिक विस्तार की विवेचना कीजिए।
  24. प्रश्न- सिन्धु सभ्यता की नगर योजना का विस्तृत वर्णन कीजिए।
  25. प्रश्न- हड़प्पा सभ्यता के नगरों के नगर-विन्यास पर विस्तृत टिप्पणी लिखिए।
  26. प्रश्न- हड़प्पा संस्कृति की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  27. प्रश्न- सिन्धु घाटी के लोगों की शारीरिक विशेषताओं का संक्षिप्त मूल्यांकन कीजिए।
  28. प्रश्न- पाषाण प्रौद्योगिकी पर टिप्पणी लिखिए।
  29. प्रश्न- सिन्धु सभ्यता के सामाजिक संगठन पर टिप्पणी कीजिए।
  30. प्रश्न- सिंधु सभ्यता के कला और धर्म पर टिप्पणी कीजिए।
  31. प्रश्न- सिंधु सभ्यता के व्यापार का संक्षेप में उल्लेख कीजिए।
  32. प्रश्न- सिंधु सभ्यता की लिपि पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।
  33. प्रश्न- सिन्धु सभ्यता में शिवोपासना पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  34. प्रश्न- सैन्धव धर्म में स्वस्तिक पूजा के विषय में बताइये।
  35. प्रश्न- सिन्धु सभ्यता के विनाश के क्या कारण थे?
  36. प्रश्न- लोथल के 'गोदी स्थल' पर लेख लिखो।
  37. प्रश्न- मातृ देवी की उपासना पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  38. प्रश्न- 'गेरुए रंग के मृदभाण्डों की संक्षिप्त विवेचना कीजिए।
  39. प्रश्न- 'मोहन जोदडो' का महान स्नानागार' पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  40. प्रश्न- ऋग्वैदिक अथवा पूर्व-वैदिक काल की सभ्यता और संस्कृति के बारे में आप क्या जानते हैं?
  41. प्रश्न- विवाह संस्कार से सम्पादित कृतियों का वर्णन कीजिए तथा महत्व की व्याख्या कीजिए।
  42. प्रश्न- वैदिक कालीन समाज पर प्रकाश डालिए।
  43. प्रश्न- उत्तर वैदिककालीन समाज में हुए परिवर्तनों की व्याख्या कीजिए।
  44. प्रश्न- वैदिक कालीन समाज की प्रमुख विशेषताओं का निरूपण कीजिए।
  45. प्रश्न- वैदिक साहित्य के बारे में संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  46. प्रश्न- ब्रह्मचर्य आश्रम के कार्य व महत्व को समझाइये।
  47. प्रश्न- वानप्रस्थ आश्रम के महत्व को समझाइये।
  48. प्रश्न- सन्यास आश्रम का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
  49. प्रश्न- मनुस्मृति में लिखित विवाह के प्रकार लिखिए।
  50. प्रश्न- वैदिक काल में दास प्रथा का वर्णन कीजिए।
  51. प्रश्न- पुरुषार्थ पर लघु लेख लिखिए।
  52. प्रश्न- 'संस्कार' पर प्रकाश डालिए।
  53. प्रश्न- गृहस्थ आश्रम के महत्व को समझाइये।
  54. प्रश्न- महाकाव्यकालीन स्त्रियों की दशा पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  55. प्रश्न- उत्तर वैदिककालीन स्त्रियों की दशा पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  56. प्रश्न- वैदिककाल में विवाह तथा सम्पत्ति अधिकारों की क्या स्थिति थी?
  57. प्रश्न- उत्तर वैदिककाल की राजनीतिक दशा का उल्लेख कीजिए।
  58. प्रश्न- विदथ पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  59. प्रश्न- ऋग्वेद पर टिप्पणी कीजिए।
  60. प्रश्न- आर्यों के मूल स्थान पर प्रकाश डालिए।
  61. प्रश्न- 'सभा' के विषय में आप क्या जानते हैं?
  62. प्रश्न- वैदिक यज्ञों के सम्पादन में अग्नि के महत्त्व को व्याख्यायित कीजिए।
  63. प्रश्न- उत्तरवैदिक कालीन धार्मिक विश्वासों एवं कृत्यों के विषय में आप क्या जानते हैं?
  64. प्रश्न- बिम्बिसार के समय से नन्द वंश के काल तक मगध की शक्ति के विकास का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
  65. प्रश्न- नन्द कौन थे? महापद्मनन्द के जीवन तथा उपलब्धियों का उल्लेख कीजिए।
  66. प्रश्न. बिम्बिसार की राज्यनीति का वर्णन कीजिए तथा परिचय दीजिए।
  67. प्रश्न- उदयिन के जीवन पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  68. प्रश्न- नन्द साम्राज्य की विशालता का वर्णन कीजिए।
  69. प्रश्न- धननंद और कौटिल्य के सम्बन्ध का उल्लेख कीजिए।
  70. प्रश्न- धननंद के विषय में आप क्या जानते हैं?
  71. प्रश्न- मगध की भौगोलिक सीमाओं को स्पष्ट कीजिए।
  72. प्रश्न- मौर्य कौन थे? इस वंश के इतिहास जानने के स्रोतों का उल्लेख कीजिए तथा महत्व पर प्रकाश डालिए।
  73. प्रश्न- चन्द्रगुप्त मौर्य के विषय में आप क्या जानते हैं? उसकी उपलब्धियों और शासन व्यवस्था पर निबन्ध लिखिए।
  74. प्रश्न- सम्राट बिन्दुसार का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
  75. प्रश्न- मौर्यकाल में सम्राटों के साम्राज्य विस्तार की सीमाओं को स्पष्ट कीजिए।
  76. प्रश्न- चन्द्रगुप्त मौर्य के बचपन का वर्णन कीजिए।
  77. प्रश्न- सुदर्शन झील पर टिप्पणी लिखिए।
  78. प्रश्न- अशोक के प्रारम्भिक जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताइये कि वह किस प्रकार सिंहासन पर बैठा था?
  79. प्रश्न- सम्राट अशोक के साम्राज्य विस्तार पर प्रकाश डालिए।
  80. प्रश्न- सम्राट के धम्म के विशिष्ट तत्वों का निरूपण कीजिए।
  81. प्रश्न- अशोक के शासन व्यवस्था की विवेचना कीजिए।
  82. प्रश्न- 'भारतीय इतिहास में अशोक एक महान सम्राट कहलाता है। यह कथन कहाँ तक सत्य है? प्रकाश डालिए।
  83. प्रश्न- मौर्य वंश के पतन के लिए अशोक कहाँ तक उत्तरदायी था?
  84. प्रश्न- अशोक ने धर्म प्रचार के क्या उपाय किये थे? स्पष्ट कीजिए।
  85. प्रश्न- सारनाथ स्तम्भ लेख पर टिप्पणी कीजिए।
  86. प्रश्न- बृहद्रथ किस राजवंश का शासक था और इसके विषय में आप क्या जानते हैं?
  87. प्रश्न- कौटिल्य और मेगस्थनीज के विषय में आप क्या जानते हैं?
  88. प्रश्न- कौटिल्य की पुस्तक 'अर्थशास्त्र' में उल्लेखित विषयों की व्याख्या कीजिए।
  89. प्रश्न- कौटिल्य रचित 'अर्थशास्त्र' में 'कल्याणकारी राज्य' की परिकल्पना को स्पष्ट कीजिए।
  90. प्रश्न- गुप्तों की उत्पत्ति के विषय में आप क्या जानते हैं? विस्तृत विवेचन कीजिए।
  91. प्रश्न- काचगुप्त कौन थे? स्पष्ट कीजिए।
  92. प्रश्न- प्रयाग प्रशस्ति के आधार पर समुद्रगुप्त की विजयों का उल्लेख कीजिए।
  93. प्रश्न- चन्द्रगुप्त (द्वितीय) की उपलब्धियों के बारे में विस्तार से लिखिए।
  94. प्रश्न- कल्याणी के उत्तरकालीन पश्चिमी चालुक्य को समझाइए।
  95. प्रश्न- गुप्त शासन प्रणाली पर एक विस्तृत लेख लिखिए।
  96. प्रश्न- गुप्तकाल की साहित्यिक एवं कलात्मक उपलब्धियों का वर्णन कीजिए।
  97. प्रश्न- गुप्तों के पतन का विस्तार से वर्णन कीजिए।
  98. प्रश्न- गुप्तों के काल को प्राचीन भारत का 'स्वर्ण युग' क्यों कहते हैं? विवेचना कीजिए।
  99. प्रश्न- रामगुप्त की ऐतिहासिकता पर विचार व्यक्त कीजिए।
  100. प्रश्न- गुप्त सम्राट चन्द्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य के विषय में बताइए।
  101. प्रश्न- आर्यभट्ट कौन था? वर्णन कीजिए।
  102. प्रश्न- राजा के रूप में स्कन्दगुप्त के महत्व की विवेचना कीजिए।
  103. प्रश्न- कुमारगुप्त पर संक्षेप में टिप्पणी लिखिए।
  104. प्रश्न- कुमारगुप्त प्रथम की उपलब्धियों पर प्रकाश डालिए।
  105. प्रश्न- गुप्तकालीन भारत के सांस्कृतिक पुनरुत्थान पर प्रकाश डालिए।
  106. प्रश्न- कालिदास पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  107. प्रश्न- विशाखदत्त कौन था? वर्णन कीजिए।
  108. प्रश्न- स्कन्दगुप्त कौन था?
  109. प्रश्न- जूनागढ़ अभिलेख से किस राजा के विषय में जानकारी मिलती है उसके विषय में आपसूक्ष्म में बताइए।
  110. प्रश्न- गुर्जर प्रतिहारों की उत्पत्ति का आलोचनात्मक विवरण दीजिए।
  111. प्रश्न- मिहिरभोज की उपलब्धियों का मूल्यांकन कीजिए।
  112. प्रश्न- गुर्जर-प्रतिहार नरेश नागभट्ट द्वितीय के शासनकाल की घटनाओं पर प्रकाश डालिए।
  113. प्रश्न-
  114. प्रश्न- गुर्जर-प्रतिहार शासक नागभट्ट प्रथम के शासन-काल का विवरण दीजिए।
  115. प्रश्न- वत्सराज की उपलब्धियों पर प्रकाश डालिए।
  116. प्रश्न- गुर्जर-प्रतिहार वंश के इतिहास में नागभट्ट द्वितीय के स्थान का मूल्यांकन कीजिए।
  117. प्रश्न- मिहिरभोज की राजनैतिक एवं सांस्कृतिक उपलब्धियों का वर्णन कीजिए।
  118. प्रश्न- गुर्जर-प्रतिहार सत्ता का मूल्यांकन कीजिए।
  119. प्रश्न- गुर्जर प्रतिहारों का विघटन पर प्रकाश डालिये।
  120. प्रश्न- गुर्जर-प्रतिहार वंश के इतिहास जानने के साधनों का उल्लेख कीजिए।
  121. प्रश्न- महेन्द्रपाल प्रथम कौन था? उसकी उपलब्धियों पर प्रकाश डालिए। उत्तर -
  122. प्रश्न- राजशेखर और उसकी कृतियों पर एक टिप्पणी लिखिए।
  123. प्रश्न- राज्यपाल तथा त्रिलोचनपाल पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  124. प्रश्न- त्रिकोणात्मक संघर्ष में प्रतिहारों की भूमिका का उल्लेख कीजिए।
  125. प्रश्न- कन्नौज के प्रतिहारों पर एक निबन्ध लिखिए।
  126. प्रश्न- प्रतिहार वंश का महानतम शासक कौन था?
  127. प्रश्न- गुर्जर एवं पतन का विश्लेषण कीजिये।
  128. प्रश्न- कीर्तिवर्मा द्वितीय एवं बादामी के चालुक्यों के अन्त पर प्रकाश डालिए।
  129. प्रश्न- चालुक्य राज्य के अंधकार काल पर प्रकाश डालिए।
  130. प्रश्न- पूर्वी चालुक्य शासकों ने कला और संस्कृति में क्या योगदान दिया है?
  131. प्रश्न- चालुक्य कौन थे? इनकी उत्पत्ति के बारे में बताइए।
  132. प्रश्न- वेंगी के पूर्व चालुक्यों पर टिप्पणी लिखिए।
  133. प्रश्न- चालुक्यकालीन धर्म एवं कला का वर्णन कीजिए।
  134. प्रश्न- चालुक्यों की विभिन्न शाखाओं का वर्णन कीजिए।
  135. प्रश्न- चालुक्य संघर्ष के विषय में आप क्या जानते हैं?
  136. प्रश्न- कल्याणी के पश्चिमी चालुक्यों की शक्ति के प्रसार का विवरण दीजिए।
  137. प्रश्न- चालुक्यों की उपलब्धियों के महत्व का वर्णन कीजिए।
  138. प्रश्न- चालुक्यों की शासन व्यवस्था का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
  139. प्रश्न- चालुक्य- पल्लव संघर्ष का विवरण दीजिए।
  140. प्रश्न- परमारों की उत्पत्ति की विवेचना कीजिए।
  141. प्रश्न- राजा भोज के शासन काल में चतुर्दिक उन्नति हुई।
  142. प्रश्न- परमार नरेश वाक्पति II मुंज के शासन काल की घटनाओं पर प्रकाश डालिए।
  143. प्रश्न- राजा भोज के शासन प्रबंध के विषय में आप क्या जानते हैं? बताइए।
  144. प्रश्न- परमार वंश के पतन पर प्रकाश डालिए तथा इस वंश का पतन क्यों हुआ?
  145. प्रश्न- परमार साहित्य और कला की विवेचना कीजिए।
  146. प्रश्न- परमार वंश का संस्थापक कौन था?
  147. प्रश्न- मुंज परमार की उपलब्धियों का आंकलन कीजिए।
  148. प्रश्न- 'धारा' पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  149. प्रश्न- सीयक द्वितीय 'हर्ष' के शासन काल की घटनाओं का उल्लेख कीजिए।
  150. प्रश्न- सिन्धुराज पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  151. प्रश्न- परमारों के पतन के कारण बताइए।
  152. प्रश्न- राजा भोज एवं चालुक्य संघर्ष का वर्णन कीजिये।
  153. प्रश्न- राजा भोज की सांस्कृतिक उपलब्धियों की विवेचना कीजिए।
  154. प्रश्न- परमार इतिहास जानने के साधनों का वर्णन कीजिए।
  155. प्रश्न- भोज परमार की उपलब्धियों का उल्लेख कीजिए।
  156. प्रश्न- परमारों की प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रकाश डालिये।
  157. प्रश्न- विग्रहराज चतुर्थ के शासन काल की घटनाओं का उल्लेख कीजिए।
  158. प्रश्न- अर्णोराज चाहमान के जीवन एवं उपलब्धियों पर प्रकाश डालिए।
  159. प्रश्न- पृथ्वीराज चौहान की उपलब्धियों की समीक्षा कीजिए। मोहम्मद गोरी के हाथों उसकी पराजय के क्या कारण थे? उल्लेख कीजिए।
  160. प्रश्न- चाहमान कौन थे? विग्रहराज चतुर्थ के विजयों का वर्णन कीजिए।
  161. प्रश्न- चाहमान कौन थे?
  162. प्रश्न- विग्रहराज द्वितीय के शासनकाल की घटनाओं पर प्रकाश डालिए।
  163. प्रश्न- अजयराज चाहमान की उपलब्धियों पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।
  164. प्रश्न- पृथ्वीराज चौहान की सैनिक उपलब्धियों का वर्णन कीजिए।
  165. प्रश्न- विग्रहराज चतुर्थ की उपलब्धियों का मूल्यांकन कीजिए।
  166. प्रश्न- पृथ्वीराज और जयचन्द्र की शत्रुता पर प्रकाश डालिये।
  167. प्रश्न- ऐतिहासिक साक्ष्य के रूप में पृथ्वीराज रासो के महत्व को स्पष्ट कीजिए।
  168. प्रश्न- चाहमान वंश का प्रसिद्ध शासक आप किसे मानते हैं?
  169. प्रश्न- चाहमानों के विदेशी मूल का सिद्धान्त पर प्रकाश डालिये।
  170. प्रश्न- पृथ्वीराज तृतीय के चन्देलों के साथ सम्बन्धों की विवेचना कीजिए।
  171. प्रश्न- गोविन्द चन्द्र गहड़वाल की उपलब्धियों का मूल्यांकन कीजिए।
  172. प्रश्न- गहड़वालों की उत्पत्ति की विवेचना कीजिए।
  173. प्रश्न- जयचन्द्र पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  174. प्रश्न- अर्णोराज के राज्यकाल की प्रमुख राजनीतिक घटनाओं पर प्रकाश डालिए।
  175. प्रश्न- चाहमानों (चौहानों) के राजनीतिक इतिहास का वर्णन कीजिए।
  176. प्रश्न- ललित विग्रहराज नाटक पर नोट लिखिए।
  177. प्रश्न- चाहमान नरेश पृथ्वीराज तृतीय के तराइन युद्धों का वर्णन कीजिए।
  178. प्रश्न- चौहान वंश के इतिहास जानने के स्रोतों का वर्णन कीजिए।
  179. प्रश्न- सामंतवाद पर विस्तृत टिप्पणी लिखिए।
  180. प्रश्न- सामंतवाद के पतन के कारण बताइए।
  181. प्रश्न- प्राचीन भारत में सामंतवाद की क्या स्थिति थी?
  182. प्रश्न- मौर्य प्रशासन और सामंतवाद पर टिप्पणी लिखिए।
  183. प्रश्न-
  184. प्रश्न- वेदों की उत्पत्ति के विषय में बताइए। वेदों ने हमारे जीवन को किस प्रकार के ज्ञान दिये?
  185. प्रश्न- हिन्दू धर्म और संस्कृति पर विस्तृत टिप्पणी लिखिए
  186. प्रश्न- हिन्दू वर्ग की जाति-व्यवस्था व त्योहारों के विषय में बताइए।
  187. प्रश्न- 'लिंगायत'' के बारे में बताइए।
  188. प्रश्न- हिन्दू धर्म के सुधारकों के विषय में बताइए।
  189. प्रश्न- हिन्दू धर्म में आत्मा से सम्बन्धित विचारों से अवगत कराइये।
  190. प्रश्न- हिन्दुओं के मूल विश्वासों से अवगत कराइए।
  191. प्रश्न- उपवास पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  192. प्रश्न- हिन्दू धर्म में लोगों के गाय के प्रति कर्तव्य से अवगत कराइये।
  193. प्रश्न- हिन्दू धर्म में
  194. प्रश्न- मुहम्मद गोरी के भारत आक्रमण का वर्णन कीजिए।
  195. प्रश्न- मुहम्मद गोरी की भारत विजय के कारणों की सुस्पष्ट व्याख्या कीजिए।
  196. प्रश्न- राजपूतों के पतन के कारणों की विवेचना कीजिए।
  197. प्रश्न- मुस्लिम आक्रमण के समय उत्तर की राजनीतिक स्थिति का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कीजिए।
  198. प्रश्न- महमूद गजनवी के भारतीय आक्रमणों का वर्णन कीजिए।
  199. प्रश्न- भारत पर मुहम्मद गोरी के आक्रमण के क्या कारण थे?
  200. प्रश्नृ- गोरी के आक्रमण के समय भारत की राजनीतिक दशा कैसी थी?
  201. प्रश्न- गोरी के आक्रमण के समय भारत की सामाजिक स्थिति का संक्षिप्त वर्णन करें।
  202. प्रश्न- 11-12वीं सदी में भारत की आर्थिक स्थिति पर टिप्पणी लिखें।
  203. प्रश्न- 11-12वीं सदी में भारतीय शासकों के तुर्कों से पराजय के क्या कारण थे?
  204. प्रश्न- भारत में तुर्की राज्य स्थापना के क्या परिणाम हुए?
  205. प्रश्न- मुहम्मद गोरी का चरित्र-मूल्यांकन कीजिए।
  206. प्रश्न- अरबों की असफलता के क्या कारण थे?
  207. प्रश्न- अरब आक्रमण का प्रभाव स्पष्ट कीजिए।
  208. प्रश्न- तराइन के प्रथम युद्ध पर प्रकाश डालिए।
  209. प्रश्न- भारत पर तुर्कों के आक्रमण के क्या कारण थे?
  210. प्रश्न- महमूद गजनवी का आनन्दपाल पर आक्रमण का वर्णन कीजिये।
  211. प्रश्न- महमूद गजनवी का कन्नौज पर आक्रमण पर प्रकाश डालिये।
  212. प्रश्न- महमूद गजनवी द्वारा सोमनाथ का विध्वंस पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिये। [
  213. प्रश्न- महमूद गजनवी के आक्रमण के कारणों का उल्लेख कीजिए।
  214. प्रश्न- भारत पर महमूद गजनवी के आक्रमण के परिणामों पर टिप्पणी कीजिए।
  215. प्रश्न- मोहम्मद गोरी की विजयों के बारे में लिखिए।
  216. प्रश्न- भारत पर तुर्की आक्रमण के प्रभावों का संक्षिप्त उल्लेख कीजिए।

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